एक नया इतिहास बनाया फिर से हिंदुस्तान ने
एक नया इतिहास बनाया फिर से हिंदुस्तान ने,
जनता को सौंपा नया संसद जब सेवक प्रधान ने,
हाथ जोड़कर मान मोड़कर फिर दंडवत प्रणाम किया,
राजनीति के मंदिर को सगर्व देश के नाम किया,
कुछ लोगों ने देश विरोधी चेहरा फिर से दिखलाया,
लोकतंत्र का मंदिर भी क्यूँ उनको रास नही आया,
कुछ पापी लोगों ने क्यूँ ये नीच हिमाकत कर डाली,
इतने पावन अवसर पर भी खुली बगावत कर डाली,
संसद भवन नही ये केवल सारे भारत की आशा है,
हर दृष्टि से परिपूर्ण गलती ना तोला माशा है,
महामहिम से हो उद्घाटन ये तो एक बहाना है,
असली मकसद तो केवल मोदी को नीचा दिखाना है,
हर सांसद का ठौर ठिकाना व्यक्तिगत आवास नही है,
फिर भी कुछ कुंठित लोगों का
क्या कुत्सित प्रयास नहीं है,
राजनीति के नये मंदिर से जिस जिसको भी नफरत है,
कर देगी प्रवेश से वंचित जनता मे वो ताकत है,
हे परमपिता हे जगतजननी मेरी विनती स्वीकार करो,
सदबुद्धि देकर सब मूर्ख लोगोंं का उद्धार करो!!
हर्ष जैन सहर्ष
Punam verma
05-Jun-2023 09:36 AM
Very nice
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Shashank मणि Yadava 'सनम'
05-Jun-2023 07:56 AM
बेहतरीन रचना
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Varsha_Upadhyay
04-Jun-2023 07:41 PM
बहुत खूब
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